भारत में एलपीजी गैस आज हर घर की रसोई की सबसे अहम जरूरत बन चुकी है। सुबह की चाय से लेकर रात के खाने तक, अधिकतर परिवार गैस सिलेंडर पर ही निर्भर हैं। ऐसे में एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में जरा सा बदलाव भी सीधे मासिक बजट को प्रभावित करता है। महंगाई के इस दौर में गैस के दाम आम लोगों के लिए हमेशा चिंता का विषय बने रहते हैं।
एलपीजी की कीमतें कैसे तय होती हैं
भारत में एलपीजी सिलेंडर की कीमतें सीधे सरकार तय नहीं करती। Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum और Hindustan Petroleum जैसी सरकारी तेल कंपनियां हर महीने अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति के अनुसार रेट तय करती हैं। इन कीमतों पर कच्चे तेल और एलपीजी के वैश्विक दाम, डॉलर के मुकाबले रुपये की स्थिति और परिवहन लागत का सीधा असर पड़ता है। घरेलू और कमर्शियल सिलेंडर के दाम अलग-अलग होते हैं, क्योंकि टैक्स और सब्सिडी की व्यवस्था भी अलग होती है।
घरेलू एलपीजी पर सब्सिडी का रोल
आम उपभोक्ताओं को राहत देने के लिए केंद्र सरकार घरेलू एलपीजी सिलेंडर पर सब्सिडी देती है। यह सब्सिडी डीबीटी यानी डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के जरिए सीधे उपभोक्ता के बैंक खाते में भेजी जाती है। सब्सिडी की राशि हर महीने एक जैसी नहीं रहती, बल्कि अंतरराष्ट्रीय कीमतों और रुपये की स्थिति के अनुसार घटती-बढ़ती रहती है। इससे घरेलू परिवारों को रसोई खर्च में कुछ राहत जरूर मिलती है।
महानगरों में घरेलू गैस के मौजूदा दाम
देश के बड़े शहरों में इस समय घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतें लगभग स्थिर बनी हुई हैं। दिल्ली, मुंबई, कोलकाता और चेन्नई जैसे महानगरों में दामों में कोई बड़ा बदलाव नहीं हुआ है। कीमतें स्थिर रहने से उपभोक्ताओं को फिलहाल किसी बड़े झटके का सामना नहीं करना पड़ा है।
कमर्शियल सिलेंडर हुआ थोड़ा सस्ता
19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में हाल ही में थोड़ी गिरावट दर्ज की गई है। इससे होटल, ढाबों और छोटे कारोबारियों की रसोई लागत कुछ कम हुई है। इसका अप्रत्यक्ष फायदा आम ग्राहकों को भी मिल सकता है, क्योंकि खाने-पीने की चीजों की कीमतों पर दबाव कम होने की संभावना रहती है।
राज्यवार कीमतों में अंतर क्यों
एलपीजी सिलेंडर की कीमतें हर राज्य और शहर में अलग होती हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में दाम अपेक्षाकृत ज्यादा हैं, जबकि दिल्ली, हरियाणा, गुजरात और महाराष्ट्र जैसे राज्यों में कीमतें कम देखी जाती हैं। परिवहन लागत और स्थानीय टैक्स इसका मुख्य कारण होते हैं।
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आगे क्या रह सकती है स्थिति
अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल और एलपीजी के दाम स्थिर रहते हैं, तो आने वाले समय में घरेलू गैस के दामों में बड़ी बढ़ोतरी की संभावना कम मानी जा रही है। सरकार की कोशिश है कि आम लोगों पर अतिरिक्त बोझ न पड़े।
निष्कर्ष
फिलहाल एलपीजी के नए रेट से यह साफ है कि घरेलू उपभोक्ताओं को न तो बड़ी राहत मिली है और न ही कोई बड़ा झटका। दाम स्थिर रहने से रसोई बजट संतुलित बना हुआ है।
Disclaimer:
यह लेख सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। एलपीजी सिलेंडर की कीमतें समय, शहर और गैस एजेंसी के अनुसार बदल सकती हैं। सटीक और ताजा रेट जानने के लिए अपनी स्थानीय गैस एजेंसी या संबंधित तेल कंपनी की आधिकारिक जानकारी पर ही भरोसा करें।







